वर्ष - 32
अंक - 34
19-08-2023

मिर्जापुर जिले की चिट्ठी :

बुल्डोजर राज के शिकार उजड़े गरीबों को आवासीय पट्टा मिला

पहली घटना: हाथरस में जैसे बिटिया की लाश को पुलिस ने जलवा दिया, उसी तरह योगी सरकार की लालगंज (मिर्जापुर) पुलिस ने हत्या का सबूत मिटाने के लिए  पोस्टमार्टम के बाद दलित युवक के शव को परिजनों को सौंप देने के बजाय भारी पुलिस बल की मौजूदगी में जला दिया. सहिरा गांव निवासी धर्मराज की लाश बीती 21 जुलाई 2023 को गांव के बाहरी इलाके में मिली थी. पुलिस ने इस घटना को आत्महत्या बताया था जबकि लाश पर प्रताड़ना के स्पष्ट चिन्ह मिले थे और परिजनों का आरोप था कि हत्या हुई है. हत्यारों को नामजद करते हुए उनके द्वारा दी गई तहरीर को भी पुलिस ने नजरअंदाज कर दिया था.

4 अगस्त 2023 को लालगंज तहसील मुख्यालय पर प्रदर्शन हुआ, जिसमें पार्टी राज्य सचिव सुधाकर यादव के नेतृत्व में करीब साढ़े तीन सौ लोगों की भागीदारी हुई. एसडीएम, लालगंज के सीओ और कोतवाल को जनता के बीच आकर कहना पड़ा कि समस्या का हल निकालने के लिए तीन दिनों के अंदर वे वार्ता करेंगे.

7 अगस्त 2023 को अखिल भारतीय खेत व ग्रामीण मजदूर सभा (खेग्रामस) की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष कामरेड जीरा भारती और भाकपा(माले) के जिला सचिव कामरेड राम प्यारे राम जब वार्ता के लिए पहुंचे तो एसडीएम ने बताया  कि वह डीएम की मीटिंग में जा रहे हैं. उन्होंने नेताओं से अगले दिन आने को कहा. सीओ से फोन पर बातचीत हुई तो कहा कि एसडीएम साहब से बात करिए हम बात करने के लिए तैयार है. पुनः एसडीएम से बात हुई तो उन्होंने कहा – ‘इंतजार करिये हम आ रहे हैं.’ लेकिन सीओ, लालगंज ने वार्ता करने से यह कहते हुए इंकार कर दिया कि बिसरा रिपोर्ट आने के बाद ही अब कोई वार्ता होगी. इसके बाद एसडीएम ने भी अपनी जबावदेही से पल्ला झाड़ लिया.

भारत छोड़ो दिवस पर 9 अगस्त को जिला मुख्यालय पर हुए प्रदर्शन में यह घटना भी प्रमुखता से उठाई गई. उस दिन सदर सीओ ने कहा – ‘10 अगस्त को आइये, नये पुलिस अधीक्षक (एसपी) आये हैं, हम वार्ता कराते हैं.’ लेकिन, डीआईजी की मीटिंग में होने का हवाला देकर एसपी ने भी मिलने से इंकार कर दिया. तब एक प्रतिनिधिमंडल एडिशनल एसपी से मिला. उन्होंने सीओ, लालगंज को फोन कर कहा कि वे हम लोगों को भेज रहे हैं, वार्ता करो. कुल मिलाकर प्रशासन अपनी जबावदेही से पल्ला झाड़ता रहा.

एएसपी के कहे मुताबिक जब कामरेड जीरा भारती और का. अमरेश भारती सीओ से मिलने गए तो उन्होंने उनको अपने कार्यालय से धक्का देकर भगा दिया. कोतवाल ने तो यहां तक कह दिया कि चाहे कुछ भी कर लो, जब तक हम यहां रहेंगे एफआइआर दर्ज नहीं होगी. इस पर हमारे साथियों ने कहा कि दस दिन के भीतर आपको घुटने टेक कर रिपोर्ट दर्ज करनी पड़ेगी.

तब आंदोलन के अगले चरण में तय हुआ कि निणार्यक लड़ाई में जाने के सिवा और कोई रास्ता नहीं है. लालगंज तहसील मुख्यालय पर 50 घंटे का धरना देने का कार्यक्रम तय हुआ. रास्ता घेर कर तहसील परिसर में धरना शुरू हुआ. नारा था – ‘कानून का राज कायम करो, हत्या का मुकदमा दर्ज करो!’ धरना शुरु होने पर एसडीएम, लालगंज आये. बोले, यहां से धरना हटाओ, एसपी और डीएम के यहां जाकर धरना-प्रदर्शन करो. लेकिन अंततः हम लोग डटे रहे. रात आठ बजे कोतवाल धरना स्थल पर आईं और उन्होंने आते ही धौंस-धमकी का दौर शुरू कर दिया. हमारी ओर से भी उनको करारा जवाब मिला. अंततः उन्हें पीछे हटना पड़ा और उन्होंने तहरीर लिखकर देने को कहा. हत्या के 23 दिन बाद और इस लंबे, दृढ़ संघर्ष के बाद इस मामले में हत्या की धारा (आइपीसी 302) के तहत मुकदमा दर्ज हुआ.

आगे के संघर्ष की तैयारी: अब हत्यारों की गिरफ्तारी की मांग को लेकर आगे की योजना बनाने के लिए पार्टी की एक बैठक सहिरा गांव में 16 अगस्त 2023 को होनी तय हुई है.

दूसरी घटना: विदित हो कि विगत 6 मई 2023 को जिले के सदर तहसील क्षेत्र के कोटवा पांडे दांती गांव में कई पीढ़ियों से बसे गरीबों के 350 घरों में से 40-45 घरों को सदर एसडीएम और सिंचाई विभाग के अधिकारियों ने भारी पुलिस बल लेकर उजाड़ दिया था. बताया गया कि इस जगह पर विश्वविद्यालय बनेगा.

गरीबों की बेदखली और आवास-पुनर्वास की व्यवस्था कराये बिना बेदखली पर रोक लगाने आदि सवालों को लेकर पार्टी के जिला सचिव राम प्यारे राम और खेग्रामस की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष जीरा भारती के नेतृत्व में जब प्रशासन की इस कार्रवाई का विरोध किया गया तो प्रशासन ने भयानक लाठीचार्ज किया और नेताओं को गिरफ्तार कर लिया. उनको कई घंटों तक थाने पर बैठाए रखा गया और उन पर मुकदमा दर्ज करने के बाद ही देर रात को रिहा किया गया. नेताओं को कोर्ट से जमानत करानी पड़ी. लेकिन आंदोलन का असर यह हुआ कि बेदखली की कार्रवाई रुक गई और भ्रष्ट  लेखपाल को जेल जाना पड़ा. साथ ही, उजाड़े गए गरीबों को आवासीय पट्टा भी देना पड़ा. इस आन्दोलन का ही असर है कि प्रस्तावित विश्वविद्यालय सथानांतरित हो गया और अब वह दूसरी जगह पर बनेगा.

योगी के बुलडोजर राज के खिलाफ आंदोलन के जरिए हासिल इस जीत की वजह से जहां एक ओर दलित-गरीबों को अपनी ताकत का एहसास हुआ है और पार्टी पर उनको भरोसा बढ़ा है तो, वहीं दूसरी ओर पार्टी कार्यकर्ताओं में भी नया जोश व उत्साह पैदा हुआ है.

– राम प्यारे राम

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