वर्ष - 32
अंक - 35
26-08-2023

पलामू (झारखंड) में आरवाइए का आजादी अभियान 15 अगस्त से रक्तदान शिविर कर शुरू किया गया है. आजादी अभियान के माध्यम से आरवाइए ने जिले के लचर स्वास्थ्य व्यवस्था से आजादी, प्रखंड-अंचल कार्यालयों में व्याप्त भ्रष्टाचार से आजादी और सांप्रदायिक नफरत से आजादी को लेकर अभियान तेज किया है.

आरवाइए ने 26-28 नवंबर 2022, को स्वास्थ सामुदायिक केंद्र और वेलनेस सेंटर का तीन दिवसीय सर्वेक्षण यात्रा की थी. इस दौरान जिले में 35 से भी ज्यादा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और वैलनेस सेंटर का मुआयना किया गया था. तीन दिनों तक चलने वाले इस सर्वे में मात्रा एक पंचायत कामगारपुर का स्वास्थ्य केंद्र खुला मिला था. बाकी सारे स्वास्थ्य केंद्रों पर ताला लगा मिला था. कमगारपुर जपला प्रखंड के अंतर्गत आता है. वहां भी एक ही प्रशिक्षित जीएनएम नर्स बैठी थीं और कोई डाॅक्टर नहीं थे. उन्होंने हमें यह भी बताया कि ‘यह स्वास्थ्य केंद्र खुला तो है पर इसमें साधारण दवाई देने के सिवाय हम कुछ नहीं कर सकते हैं, और प्रसूति के सारे बेड और व्यवस्था होने के बावजूद पानी की सुविधा नहीं होने के कारण प्रसूति नहीं की जा सकती है.’

पांकी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में किसी स्वास्थ्य पदाधिकारी (डाॅक्टर) की नियुक्ति नहीं की गई है. जो डाॅक्टर कार्यरत हैं उनमें से एक डाॅक्टर लोहारसी सीएससी से हैं और दूसरे कोनवाई सीएससी के हैं. पांकी में इन्हीं को डिप्यूुटेशन कर दो डाॅक्टरों की आपूर्ति की गई है. पांकी स्वास्थ्य केंद्र में आंख और दांत के विभाग तो खुले हें, लेकिन यहां महिला प्रसूति (सर्जरी) की कोई सुविधा नहीं है. महिला स्वास्थ्य अधिकारी की नियुक्ति नहीं की गई है.

इस सर्वेक्षण के दौरान ही आरवाइए ने पूरे जिले में लचर स्वास्थ्य व्यवस्था को बेहतर करने का अभियान लेने का संकल्प लिया था और आजादी अभियान का एक उद्देश्य पलामू के सारे स्वास्थ्य केंद्रों को सुचारु रुप से चालू करवाना और सारे सीएससी हेल्थ वैलनेस सेंटर में कम से कम एक डाॅक्टर और दो नर्सों की नियुक्ति की गारंटी करवाना भी है.सारे स्वास्थ्य केंद्रों को 24 घंटा चालू रखना, उसमें सारी दवाइर्यों से लेकर के हर तरह की जांच की सुविध, प्रखंड लेवल के सारे अस्पतालों में सर्जरी की सुविधा और ब्लड बैंक की सुविध होना हमारी मांग है.

छतरपुर और पांकी ऐसे दो बिंदु हैं जो जिला मुख्यालय डाल्टेनगंज से बहुत दूर हैं. अतः इन दोनों केंद्रों पर सर्जरी कर प्रसूति करने की सुविधा होनी ही चाहिए.

मेदनीनगर सदर अस्पताल अब एमएमसीएच यानी कि मेदिनीनगर मेडिकल काॅलेज व अस्पताल बन चुका है, हजार करोड़ का फंड आने के बावजूद यहां ट्राॅमा सेंटर नही है. किडनी और हर्निया के मामूली ऑपरेशन के लिए यहां से रोगियों को रेफर कर दिया जाता है. हृदय और दिमाग के ऑपरेशन के लिए तो सोचा भी नहीं जा सकता.

स्वास्थ्य विभाग में बहालियां निकाल कर डाॅक्टर, नर्स व टेक्नीशियन के खाली पड़े पदों पर नियुक्ति नहीं हो रही है. बालाजी इंटरप्राइजेज जैसी संस्थाओं और एनजीओ को संविदा पर बहाली व नियुक्ति करने का अधिकार दे दिया गया है. इस अभियान के जरिए हम यह भी कहना चाहते हैं कि सरकारी व्यवस्था को लचर रखे रहने में सरकार व काॅरपोरेट की मिली-जुली साजिश है, यहां हम देख सकते हैं कि जनता के द्वारा दिए गए टैक्स से जमा करोड़ो रुपये के फंड बड़े-बड़े स्वास्थ्य केंद्रों और वेल्थ एंड वैलनेस सेंटर को खोलने में खर्च किया जा रहा है. जैसा कि हम देख सकते हैं कि बोरोदीरी में दो करोड़ से भी ऊपर का फंड देकर के विगत 10 सालों से एक स्वास्थ्य केंद्र का ढांचा खड़ा किया हुआ है. यहां भवन तो बना है पर स्वास्थ्य केंद्र शुरू नहीं हुआ है. इसी तरह से आसेहार के स्वास्थ्य केंद्र के भवन को बने हुए भी 4 साल बीत चुके हैं. 7 से 8 करोड़ फंड इस स्वास्थ्य केंद्र को बनाने के लिए दिया गया था. ऐसा  ही भवन मेराल, पाटन में बंद पड़ा है, यहां तक कि स्वास्थ्य पदाधिकारियों और डाॅक्टरों-नर्सों को रहने के लिए आवास भी उसी कैंपस में बनाए गए हैं, पर स्वास्थ केंद्रों पर ताला पड़ा है. करोड़ों की फंड की हेरा फेरी पलामू एमएमसीएच के नियुक्तियां की जाती हैं लेकिन हमारे नेता और मंत्री रामचंद्र चंद्रवंशी जैसे लोग बालाजी इंटरप्राइजेज को एमएमसीएच में बहालियां करने के लिए टेंडर देते हैं.

यह साजिश और भी गहरे तरीके से तब समझ में आयी थी जब करोना के दौर में आरवाइए ने एमएमसीएच में स्वास्थ्य सहायता केंद्र लगाया था. वहां पर देखा गया कि सरकार ने कोरोना से लड़ने के लिए वेंटिलेटर इंस्टाॅल करने का और वेंटिलेटर के लिए एक स्पेशल वार्ड बनाने का वादा किया था. वेंटिलेटर रहने के बावजूद एक भी ऑपरेटर न होने के कारण यह सारी व्यवस्था पड़े-पड़े धूल खा रही है. ये सुविधाएं अगर सरकारी अस्पताल में न हों तो मरीज प्राइवेट संस्थानों की तरफ भागते हैं. मोदी सरकार ने  सारे प्राइवेट संस्थानों में इलाज के लिए गोल्डन कार्ड या आयुष्मान कार्ड के जरिए मुफ्त में इलाज का विश्वास दिलाया. इसमें सिर्फ बीमा कंपनियों को ही फायदा मिल रहा है, इलाज नहीं. शहर में 10 प्रतिशत डाॅक्टर भी आयुष्मान कार्ड से इलाज व ऑपरेशन नहीं कर रहे हैं. लगातार सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्थाओं को खराब रखना और निजी अस्पतालों के जेबों को भारी करना सरकारों की मंशा बनती नजर आ रही है.

इसमें भी भयंकर भ्रष्टाचार है. यह युवाओं को स्थाई रोजगार से दूर रखने की साजिश भी है. कोई भी व्यवस्था तभी बेहतर तब काम करती हैं जब उसमें कार्यरत लोगो को बेहतर जीवन सुरक्षा मिलती है. जब स्टाफ ही अंडर पेड और संस्था अंडर स्टैफ हो तो कोई व्यवस्था कैसे बेहतर तरीके से काम कर सकती है?

आज अस्पताल में काम करने वाले हर मुलाजिम को पता है कि उनको किसी भी वक्त कभी भी निकाला जा सकता है और अगर वह रिटायर होते हैं तो उन्हें पेंशन भी नहीं मिलेगी. स्वास्थ्य व्यवस्थाओं को बेहतर करने के लिए डाॅक्टर और नर्स के सिवाय भी सारे हेल्थ वेलनेस सेंटर में स्टाफ नियुक्त कियें जाए तो छोटे सेंटरों को चलाने के लिए कम से कम पांच और बड़े सेंटरो को चलाने के लिए कम से कम 10 स्टाफ की नियुक्ति तुरत होगी. अनुमानतः पलामू जिले में ही हजारों युवाओं को रोजगार का अवसर मिलेेगा.

जिले में शिक्षा व्यवस्था का भी यही आलम है. स्कूलों में शिक्षक बहुत कम है. दुनिया में सबसे ज्यादा युवाओं के देश भारत में सबसे ज्यादा बेरोजगारी है. इसका एक अहम कारण है कि केंद्र की जो सरकार है, युवाओं को आपस में धर्म और संप्रदाय के नाम पर लड़ाने को तैयार हैं ताकि वह बहालियां और विकास कार्य न करे और आने वाले चुनाव में नफरत फैला कर फिर से सत्ता में आ जाए. मणिपुर शांत नहीं हुआ तबतक नूंह में दंगे भड़क गए.

पांकी में भी कुछ महीने पहले दंगे भड़के. इन दंगो को भड़काने में स्थानीय विधायक का हाथ था. विधायक अपने आपको हिंदू कहते हैं और सांप्रदायिकता की भावना को बढ़ाते हैं. आजादी अभियान के दौरान आरवाइए सांप्रदायिक विधायकों, मंत्रियों और सरकारों को चिन्हित करने का काम करेगा और पलामू में सैकड़ों सामूहिक दावतों का आयोजन कर आपसी प्रेम के संदेश को जन-जन तक ले जाने का कोशिश करेगा.

प्रखंड कार्यालयों एवं अन्य सरकारी महकमों में व्याप्त भ्रष्टाचार एक और अहम मुद्दा है. बेरोजगार युवा जो महंगाई और लचर स्वास्थ्य-शिक्षा व्यवस्था में पहले से ही पीस रहा है और तंगहाल है, उसे चाहे पीएम किसान लोन के साधारण प्रक्रिया में या अपनी जमीन की रसीद कटवाने में भी घूस देनी पड़ती है. अन्यथा प्रखंड कार्यालय के चक्कर काटते-काटते उसके चप्पल घिस जाते हैं.

इसको दुरुस्त करने के लिए हर प्रखंड कार्यालय पर आरवाइए सहायता केंद्र लगाने की मुहिम चला रहा है. हर मंगलवार को पाटन प्रखंड कार्यालय में सहायता केंद्र लग रहा है. जहां पर आम लोग भी अपनी समस्याओं को लेकर आ रहे हैं. उसी तरह हर शुक्रवार को पांकी प्रखंड कार्यालय में सहायता केंद्र लगाया जाता है.

इन 4 महीनों के अभियान में युवाओं से संपर्क स्थापित किया जाएगा और अभियान की परिणिति युवाओं के जोशीले डंडा मार्च में होगी. इस डंडा मार्च में शामिल युवाओं का नारा होगा: युवाओं का यही नारा होगा कि -

सांप्रदायिक नफरत के खिलाफ चलेगा युवाओं का डंडा!
लचर स्वास्थ्य व्यवस्था के खिलाफ चलेगा युवाओं का डंडा!
बेरोजगारी के खिलाफ चलेगा युवाओं का डंडा!
भ्रष्टाचार के खिलाफ चलेगा युवाओं का डंडा!