वर्ष - 32
अंक - 38
15-09-2023

अखिल भारतीय प्रगतिशील महिला एसोसिएशन (ऐपवा) का 9वां उ. प्र. राज्य सम्मेलन 10 सितंबर को वाराणसी के रानी लक्ष्मीबाई एवं सुशीला सामद हाॅल (सुंदरपुर, ककर्मत्ता) वाराणसी में सावित्री बाई फुले और फातिमा शेख मंच पर आयोजित हुआ.

सम्मेलन में लखनऊ, गोरखपुर, सीतापुर, लखीमपुर, कानपुर, इलाहाबाद, बलिया, मऊ, देवरिया, गाजीपुर, मिर्जापुर, सोनभद्र, चंदौली वाराणसी समेत प्रदेश के विभिन्न जिलों से आई हुई महिला प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया.

सम्मेलन की शुरूआत ऐपवा आंदोलन की शहीद महिलाओं को श्रद्धांजलि के साथ की गई.

सम्मेलन के उद्घाटन सत्र को ऐपवा की राष्ट्रीय महासचिव मीना तिवारी, प्रदेश अध्यक्ष कृष्णा अधिकारी, ‘समकालीन जनमत’ पत्रिका के संपादक रामजी राय, दिल्ली से आई विशिष्ट अतिथि ‘मूक नायक’ पत्रिका की संपादक मीना कोटवाल, प्रलेस की जिला सचिव एवम आर्य महिला डिग्री काॅलेज की प्रो. वंदना चौबे, गांधी स्टडी सेंटर से मुनीजा रफी खान, एलआईसी मंडल कार्यालय से रेणुका, सर्व सेवा संघ से जागृति राही, मार्क्सवादी विचारक वीके सिंह ने संबोधित किया.

सम्मेलन का उद्घाटन करते हुए ऐपवा की राष्ट्रीय महासचिव मीना तिवारी ने कहा की ‘बहुत हुआ महिलाओं पर वार, अबकी बार मोदी सरकार’ का नारा देकर सत्ता में आयी मोदी सरकार की नीति पूरी तरह से अपने नारे के खिलाफ रही है. आज नारा बदल गया है – ‘जब से आयी मोदी सरकार, महिलाओं पर वार ही वार’ हो रहा है. उन्होंने कहा कि ये सरकार बेटियों को बचाने का नारा देती है और बलात्कारियों को बचाने में लगी रहती है. मणिपुर में कुकी महिलाओं पर हुए अत्याचार और महिला पहलवानों के आंदोलन की बात करते हुए उन्होंने कहा कि महिलाओं पर अत्याचार और उनको नंगा करना, घुमाना और बलात्कार करना नई घटना नहीं है. यह दुःखद और गलत है. इसमें सबसे बड़ी, खतरनाक व शर्म की बात है प्रधान मंत्री मोदी की चुप्पी. उन्होंने कहा कि बेटियों को बचाना है तो भाजपा को हटाना होगा.

उन्होंने कहा कि मोदी जी महिलाओं को परिवार मानकर उपहारस्वरूप गैस सिलेंडर का दाम 200 रुपए कम कर हितैषी होने का दिखावा कर रहे हैं. जबकि महिलाओं को उपहार नहीं हिस्सा चाहिए. इस देश में कुछ लोग हैं जिनको एक महीने की सैलरी लाखों लाख रुपए मिलते हैं, जबकि बड़ी आबादी को हजार-दो हजार रूपए भी नहीं मिलते. आशा, आंगनबाड़ी, रसोईया वर्कर व पूरी ग्रामीण आबादी इसका उदाहरण है जिनको बहुत कम पैसे में ही काम करना पड़ता है. काम की जगहों पर उनके साथ यौन हिंसा होती है.

देश में आजादी के 75 साल पूरा होने पर ‘अमृत काल’ का नाम दिया गया है, लेकिन गैर-बराबरी कम होने के बजाय लगातार तेजी से बढ़ रही है. अमीर और अमीर होते जा रहे हैं और गरीब और गरीब होते जा रहे हैं, इसके लिए सरकार की जन विरोधी नीति जिम्मेदार है.

महिलाओं के हित में प्रचार करते हुए कानून में बदलाव किया जा रहा है लेकिन यह बदलाव महिलाओं को गुलाम बनाने की नीति का हिस्सा है. रोजगार, स्वास्थ्य, शिक्षा पर तेजी से हमला बढ़ रहा है. इसके लिए कार्पोरेट-परस्त जन विरोधी मोदी नीति जिम्मेदार है. दुनिया की सबसे अमीर पार्टी होने का दावा करने वाली भाजपा पैसे का उपयोग शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार पर नहीं करना चाहती, बल्कि पैसे का उपयोग विधायकों, सांसदों व मीडिया को खरीदने में करती है. आज देश का लोकतंत्र व संविधान खतरे में है. हमारा भविष्य खतरे में है. हमें अपने हक के लिए लड़ना होगा.

सम्मेलन को संबोधित करते हुए दिल्ली से आयी ‘मूकनायक’ पत्रिका की संपादक मीना कोटवाल ने कहा कि डा. बाबा साहब के मिशन को आगे बढ़ाने के लिए मूकनायक पत्रिका को पुनः शुरू किया गया है. महिलाओं की आवाज को वैसे ही दबाया जाता है, अगर आप दलित, आदिवासी समाज से आते है तो आपकी आवाज पूरी तरह दबा दी जाएगी. मेन स्ट्रीम मीडिया में हमारी बात नहीं आती, इसलिए हमारी मीडिया जरूरी है. उन्होंने सावित्री बाई फुले व फातिमा शेख को याद करते हुए बताया कि जिसने शिक्षा के लिए पहला स्कूल खोला उनको भी हम सब नहीं जानते. समाज को बदलने के लिए काम करना है तो गाली सुननी पड़ेगी. इस तरह के लोगों को अपने काम से जवाब देना होगा. आज मूकनायक के काम की चर्चा देश में ही नहीं, विदेशों में भी हो रही है. एक महिला इसका नेतृत्व कर रही है, जिसमें सभी लोग शामिल हैं.

गांधी स्टडी सेंटर, बीएचयू की मुनीजा रफी खान ने कहा कि विकास के नाम पर पूंजीपतियों को मुनाफा पहुंचाने के लिए संस्थाओं को बुल्डोजर लगाकर गिराया जा रहा है. सर्वसेवा संघ को बिना किसी आर्डर के ही गिरा दिया गया, इसी तरह से गरीबों का भी मकान गिरा दिया जा रहा है. उन्होंने कहा कि सरकार का विरोध करने वाले लोगों को देशद्रोही बताया जा रहा है. संविधान व लोकतंत्र बचाने के लिए सबको आगे आना होगा.

सर्वसेवा संघ से जागृति राही ने कहा कि जी-20 में लगा 27 करोड़ रुपये का टेंट ढह गया. ये सरकार जनता के पैसे को प्रचार प्रसार में खर्च कर रही है. ये सरकार जनता के वोट को भी लूट रही है. हम अपने बूथ पर हराने का जिम्मा लेंगे और इस सरकार को 2024 में हराकर सत्ता से बाहर कर देंगे. ये लोग सर्वसेवा संघ को ध्वस्त कर करोड़ों की किताबें सड़ा रहे हैं. इनको पढ़ने, लिखने व किताबों से कोई मतलब नहीं है.

भारतीय जीवन बीमा निगम की रेणुका ने कहा कि निजीकरण व छंटनी की तलवार सबसे पहले महिलाओं पर ही पड़ती है, इसीलिए सबसे पहले और सबसे आगे महिलाओं को ही लड़ना है.

प्रलेस की जिला सचिव व आर्य महिला डिग्री काॅलेज की प्रो. वंदना चौबे ने कहा कि हमलोगों को एक दूसरे से मिलकर अपने हक की लड़ाई व्यापक व तेज करना होगा. ऐपवा की प्रदेश अध्यक्ष कृष्णा अधिकारी ने अतिथियों को धन्यवाद दिया. संचालन ऐपवा की राज्य सचिव कुसुम वर्मा ने किया.

सम्मेलन में सांस्कृतिक कार्यक्रम के तहत ऐपवा यंग गर्ल्स द्वारा ग्रुप डांस की प्रस्तुति दी गई जिसका निर्देशन ऐपवा जिला उपाध्यक्ष विभा प्रभाकर ने किया. इसके अतिरिक्त प्रंजना महंती द्वारा एकल नाटक, सुतपा गुप्ता द्वारा एकल नृत्य, विभा वाही और साथियों द्वारा जनवादी गीत, डीपी सोनी और यौदेश बेमिसाल द्वारा क्रांतिकारी गीत की प्रस्तुति दी गई. सांस्कृतिक कार्यक्रम का संचालन जिला सहसचिव सुजाता भट्टाचार्य ने किया.

सम्मेलन के सांगठनिक सत्र में निवर्तमान प्रदेश सचिव कुसुम वर्मा द्वारा ऐपवा के तीन साल के कामकाज का मसौदा दस्तावेज पढ़ा गाया जिस पर 18 प्रतिनिधियों ने अपनी बात रखी. स्पष्टीकरण के बाद रिपोर्ट को सर्वसम्मति से पारित कर दिया गया. सांगठनिक सत्र के अध्यक्ष मंडल में विद्या रजवार, आरती राॅय, गीता पांडे, कमला गौतम, रेखा पासवान, मुन्नी गौंड एवम स्मिता बागड़े शामिल रहीं.

राज्य सम्मेलन की सफलता के लिए प्रो. रूपरेखा वर्मा और मानवाधिकार कार्यकर्ता तीस्ता सीतलवाड़ ने भी अपने शुभकामना संदेश भेजे.

9वें राज्य सम्मेलन से 40-सदस्यीय राज्य कौंसिल और 19-सदस्यीय राज्य कार्यकारिणी का गठन किया गया. कृष्णा अधिकारी और कुसुम वर्मा को पुनः प्रदेश अध्यक्ष व प्रदेश सचिव चुना गया.

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