वर्ष - 32
अंक - 39
23-09-2023

“मोदी सरकार भारत को दुनिया की पांचवीं अर्थव्यवस्था तक पहुंचाने के लिए अपना गुणगान करती रहती है. जबकि सच्चाई यह है कि बड़े पैमाने की महंगाई देश की अर्थव्यवस्था का आकार बढाती है. उन्होंने मोदी सरकार से सवाल किया कि दुनिया की पांचवी अर्थव्यवस्था भारत की प्रति व्यक्ति आय भी दुनिया में पांचवे नम्बर पर क्यों नहीं है? आज प्रति व्यक्ति आय के मामले में हम दुनिया के 127 देशों से पीछे क्यों है? उन्होंने कहा कि आज देश भर में इस महंगाई, कर्ज और बेरोजगारी के कारण किसान, मजदूर, छात्र बड़े पैमाने पर आत्महत्या कर रहे हैं. पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी संसद के विशेष सत्र में कह रहे हैं कि रोना-धोना छोड़ो और भारत को 2047 में दुनिया की तीसरी ताकत बनाने का सपना देखो. उनका संदेश साफ है कि अब जनता और देश से जुड़े मुद्दों की बात नहीं होगी.” – भाकपा(माले) महासचिव का. दीपंकर भट्टाचार्य ने विगत 19 सितंबर 2023 को झुमरी तिलैया (कोडरमा) के प्रखंड मैदान में आयोजित किसान-मजदूर संकल्प सभा व रैली को संबोधित करते हुए ये बातें कही.

कामरेड दीपंकर ने कहा कि दिल्ली में संसद की विशेष सत्र की शुरूआत पुराने संसद से शुरू होकर आज नए संसद में हो रही है. संसद के विषेश सत्र से पहले प्रधानमंत्री कह रहे हैं कि 2047 तक भारत को विकसित देश बनाना है. उनके विकसित भारत में किसान-मजदूरों और युवाओं की बातें बेकार की रोने-धोने वाली बाते हैं. आम लोगों की लगातार घटती आमदनी, बिजली-पानी की किल्लत और किसान-मजदूरों के सवालों से उनका कोई वास्ता नहीं है.

उन्होंने कहा कि वे कहते हैं कि सरकारी सेक्टर काम नहीं करता है, इसलिए निजीकरण कर रहे हैं. पर आज चांद पर भारत को पहुंचाने वाला इसरो सरकारी संस्थान ही है. हमारे अंतरिक्ष यानों के लिए लांचिंग पैड बनाने वाला भारत हैवी इंजीनियरिंग भी सरकारी संस्थान ही है. पर रांची में लांचिंग पैड बनाने वाले इनके कर्मचारियों, अधिकारियों, इंजीनियरों को मोदी सरकार ने पिछले 18 महीने से वेतन भी नहीं दिया है.

अमृत काल में अडानी-अंबानी के लिए बैंक लूटने का रास्ता खोला जा रहा है, लेकिन किसनों की ऋण माफी नहीं हो रही है. यदि एमएसटी तय कर दी गई है तो केंद्र सरकार को उस दर पर फसल खरीदने की गारंटी भी तो करनी करनी चहिए, नहीं तो एमएसटी का क्या मतलब होगा?

उन्होंने कहा कि आरएसएस हमेशा से भारत के संविधान के खिलाफ रहा है. अब मोदी सरकार के आर्थिक सलाहकार ने संविधान को बदलने की बात कह कर इस बात को और भी पुख्ता कर दिया है कि यह सरकार भारत के संविधान को ख़त्म कर लोकतंत्र को भी खत्म कर देना चाहती है.

भाकपा(माले) महासचिव ने कहा कि भारत के सीएजी की हाल में आ रही तमाम विभागों से सम्बन्धित आडिट रिपोर्टें बता रही हैं कि मोदी सरकार भारत की अब तक की सबसे भ्रष्ट सरकार रही है. इस सरकार में एक किलोमीटर सड़क की लागत 250 करोड़ रुपए दिखाई गयी है. कामरेड दीपंकर ने कहा संसद के इतिहास को बताते हुए प्रधान मंत्री यह बात छुपा गए कि इसी संसद द्वारा पारित तीन कृषि कानूनों को ऐतिहासिक किसान आंदोलन के दबाव में इसी संसद ने वापस भी लिया था. इसीतरह जी 20 के दौरान गरीबों की बस्तियों को दीवार खड़ी कर और परदे लगाकर छुपाया गया. दिल्ली में कोविड के दौरान के लाॅकडाउन जैसा माहौल बनाया गया.

भाजपा 2024 का चुनाव झूठ की बुनियाद पर लड़ना चाहती है, हमें चुनाव को सच के मुद्दों पर ले जाना होगा. यह सरकार से सवाल करने का समय है. 2024 का चुनाव देश के गरीबों, मजदूरों, किसानों, छात्रों, कर्मचारियों के मुद्दों पर लड़ा जाए – इस बात की गारंटी जन आंदोलनों को तेज करके हमें करनी होगी.

कहा कि अब देश के किसान मजदूर सभी आंदोलन की राह पर है. देश के किसानों ने ये भी बता दिया कि अगर संसद भी गलत और जनविरोधी कानून बनाएगी तो देश के किसान और मजदूर लड़कर उसे वापस कराने  की ताकत रखते हैं.

धर्म के नाम पर कोई वोट नहीं मांग सकता है लेकिन कर्नाटक चुनाव में प्रधानमंत्री समेत सभी भाजपा नेता ऐसा करते दिखे. चुनाव आयोग ने तो इस पर कोई निर्णय नहीं लिया लेकिन कर्नाटक की जनता ने अपना फैसला सुना दिया है. उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार देश को बांटने की राजनीति कर रही है. हिंदुस्तान में अंग्रेजों की तरह राजनीति करने वाली भाजपा को जनता सबक सिखाएगी. 

उन्होंने कहा कि 2024 का चुनाव ‘लोकतंत्र बचाओ, संविधान बचाओ’ नारे के साथ समूचा विपक्ष ‘इंडिया’ के बैनर तले एकजुट होकर चुनाव लड़ेगा और भाजपा को सत्ता से बेदखल करेगा. इसीलिए जब से ‘इंडिया’ बना है, तभी से इतना मोदी इतना बोखला गए हैं कि अनाप-शनाप बोलना शुरू कर दिए हैं.  यह देश मजदूरों और किसानों के हिसाब से चलेगा और वे आगामी लोकसभा चुनाव में कोडरमा में लाल लहर पैदा कर महेन्द्र सिंह के सपनों को साकार करेंगे.

सभा को संबोधित करते हुए अखिल भारतीय किसान महासभा के राष्ट्रीय महासचिव  राजाराम सिंह ने कहा कि जी-20 सम्मेलन संपन्न होने के साथ ही भारत में अमेरिकी सेव का आयात शुरू हो गया. उन्होंने कहा कि ऊसना चावल विदेशों में भेजने के फैसले से किसानों और आम जनता के समक्ष भुखमरी का संकट पैदा हो जाएगा. आदिवासियों को भी जल, जंगल, जमीन व वन अधिकारों से बेदखल किया जा रहा है. उन्होंने कहा कि जो किसान-मजूदरों की बात करेगा, वही देश पर राज करेगा.

भाकपा(माले) विधायक का. विनोद सिंह ने कहा कि पूरे देश में कल-कारखानों और उद्योगों की हालत बदतर हैं लोगों की आकांक्षा के विपरीत कोडरमा लोकसभा क्षेत्र में अबतक सबसे कम विकास राशि मिली है. विदेशी कंपनियों की लापरवाही से मजदूरों की मौत पर केंद्र सरकार कार्रवाई करने में अक्षम है.

सभा के अंतिम वक्ता के रुप में संबोधित करते हुए पूर्व विधायक और किसान सभा के प्रदेश सचिव कामरेड राजकुमार यादव ने कहा कि भाजपा को कोडरमा की जनता से दुबारा वोट मांगने का आधिकार नहीं है.

रैली व सभा की अध्यक्षता भाकपा(माले) जिला सचिव राजेंद्र मेहता और संचालन इब्राहिम अंसारी ने किया. इस रैली को भाकपा(माले) पोलित ब्योरो सदस्य का. जनार्दन प्रसाद, पंजाब से आए किसान नेता का. गुरनाम सिंह भिखी, किसान महासभा के राष्ट्रीय सचिव व बिहार के विधायक का. सुदामा प्रसाद तथा जयंती चौधरी, भुवनेश्वर केवट, अशोक पासवान, राजेश यादव, संदीप कुमार, बहादुर यादव, अशोक यादव, तुलसी राणा, भागीरथ सिंह, विनोद पांडेय आदि समेत दर्जनों स्थानीय नेताओं ने भी संबोधित किया. सभा में भाकपा(माले) राज्य सचिव मनोज भक्त, पूरन महतो, परमेश्वर महतो, सीताराम सिंह, सविता सिंह, कोशल्या दास आदि भी मुख्य रूप से उपस्थित थे.


विश्वकर्मा योजना जातिवाद को स्थाई बनाए रखने का प्रोजेक्ट 

भाकपा(माले) महासचिव कामरेड दीपंकर भट्टाचार्य ने मोदी सरकार की बहुप्रचारित विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना को भारत में जातिवादी व्यवस्था को स्थाई रूप से बनाए रखने की भाजपा-आरएसएस की साजिश करार दिया है. उन्होंने कहा कि यह सरकार देश की दलित-पिछड़ी जातियों को इस योजना के नाम पर उन्हीं परम्परागत कामों में बांधे रखना चाहती है जो वर्ण व्यवस्था में उनके लिए तय थे, जबकि हमारा संविधान जिस आजादी की बात करता है वह एक काम को छोड़ दूसरे काम करने की आजादी से भी जुड़ा है. जाति के विनाश के लिए यह आजादी जरूरी है.


अखिल भारतीय किसान महासभा की राष्ट्रीय परिषद की दो दिवसीय बैठक 

रैली के बाद अखिल भारतीय किसान महासभा की राष्ट्रीय परिषद की दो दिवसीय बैठक शुरू हुई. बैठक में बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, उत्तराखंड, उडीसा, तमिलनाडु, दिल्ली सहित देश भर से अखिल भारतीय किसान महासभा के नेता शामिल हुए.