वर्ष - 33
अंक - 11
09-03-2024

अखिल भारतीय प्रगतिशील महिला एसोसिएशन (ऐपवा) ने 6 मार्च 2024 को पटना में अन्तर्राष्ट्रीय महिला दिवस कार्यक्रम का आयोजन किया.

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए ऐपवा महासचिव मीना तिवारी ने कहा कि अन्तर्राष्ट्रीय महिला दिवस इस बात का प्रमाण है कि महिलाएं अगर एकजुट होकर अपने अधिकारों के लिए संघर्ष करें तो निश्चित रूप से वे अपने अधिकारों को हासिल कर सकती हैं. उन्होंने कहा कि मेहनतकश महिलाओं ने सबसे पहले 8 मार्च मनाना शुरू किया और आज यह पूरी दुनिया की महिलाओं का दिन बन गया है. सभा को महिला आयोग की पूर्व अध्यक्ष मंजू प्रकाश ने भी संबोधित किया और अपनी स्वरचित कविता सुनाई.

सभा को ऐपवा की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष शशि यादव, सरोज चौबे, मीरा दत्त, राज्य सचिव अनीता सिन्हा, माधुरी गुप्ता, समता राय, रमिता जी, रीना प्रसाद, राखी मेहता, आब्दा खातुन समेत कई महिलाओं ने संबोधित किया. कार्यक्रम का संचालन ऐपवा की नगर सचिव अनुराधा ने किया.

बेबी  देवी और और उनकी टीम ने महिला अधिकारों पर गीत गाया. कई महिलाओं ने अपनी कविताओं और गीतों की प्रस्तुति दी. महिला अधिकारों पर होली के धुन पर महिलाओं ने स्वरचित गीत गाए. अंत में फिलिस्तीन की महिलाओं के साथ एकजुटता प्रकट करते हुए गाजा पर इजरायल के हमले को बंद करने की मांग की गई.

उदयपुर (राजस्थान) में अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए ऐपवा की राष्ट्रीय सचिव का. सुधा चौधरी ने इसकी ऐतिहासिक पृष्ठभूमि पर रोशनी डालते हुए बताया कि दुनिया भर में मेहनतकश महिलाएं बेहतर दुनिया बनाने के लिए शोषण के खिलाफ अपने अधिकारों के संघर्षों का नेतृत्व करती रही हैं. राज्य सचिव का. फरहत बानू ने ऐपवा के तहत देश व दुनिया में महिलाओं के संघर्षों का जिक्र करते हुए बताया कि वर्तमान दौर में महिलाओं की आजादी की लडाई संगठित होकर ही लडी जा सकती है. प्रो. मीनाक्षी जैन ने महिलाओं को ऐपवा में और अधिक भागीदारी तय करने का आह्वान किया. नजर स्वर्णकार, नजमा, रईसा, विमला ने भी अपनी बात रखी. कार्यक्रम का संचालन रिंकू परिहार ने किया. सभी महिलाओं ने बुलंद नारों के साथ कार्यक्रम का समापन किया.

रामगढ़ (झारखंड) में ऐपवा सचिव नीता बेदिया, अध्यक्ष रीता सोरेन, उपाध्यक्ष कांति देवी और सीता देवी के नेतृत्व में ग्राम बारीडीह और जोबला में सैकड़ों महिलाओं की उपस्थिति में अतंराष्ट्रीय महिला दिवस मनाया गया.

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए रीता सोरेन ने होड़ संताली भाषा में महिला दिवस के महत्व पर प्रकाश डालते हुए संगठित होकर संघर्ष करने पर जोर दिया.

सहिया द्रोपदी देवी, संगीता बेसरा, हीरामनी देवी, आरती देवी, देवंती देवी, खुशबू कुमारी, मनीता देवी, शीला देवी और नीता बेदिया ने कहा कि हमें अपने संस्कृति, शिक्षा, रोजगार, स्वास्थ, सुरक्षा, सम्मान, बराबरी, आरक्षण तथा सामाजिक-आर्थिक व राजनीतिक अधिकार को बचाने के लिए खुद आगे आना होगा.

अपने हाथों में झंडा बैनर लिए महिलाओं ने ‘हमारी जंग जारी है’, ‘हम लड़ेंगे और जीतेंगे’. ‘लोकसभा चुनाव से पहले महिला आरक्षण बिल लागू करो’. ‘महिलाओं को सुरक्षा, बराबरी और आजादी देनी होगी’, ‘महिलाओं को रोजगार देना होगा’. ‘महिलाओं को निःशुल्क शिक्षा देना होगा’, ‘8 मार्च, महिला दिवस जिंदाबाद!’ आदि नारे लगाये.

बनारस में महिला अधिकार सम्मेलन 

3 मार्च को बनारस के शास्त्री घाट (कचहरी) पर महिला अधिकार सम्मेलन का आयोजन किया गया. सम्मेलन की शुरुआत से पूर्व जेपी मेहता इंटर कॉलेज से शास्त्रा घाट तक मार्च भी निकाला गया.

बनारस की महिलाओं ने बराबरी, सम्मान, सुरक्षा और रोजगार के अधिकार के लिए एकजुट होकर सरकार तथा सभी राजनीतिक दलों से यह अपील की कि आने वाले लोकसभा चुनाव में वे मन्दिर-मस्जिद और नफरती मुद्दों के बजाय रोटी, कपड़ा, मकान, शिक्षा, स्वास्थ्य, सुरक्षा और सामाजिक न्याय जैसे असल मुद्दों पर प्रचार करें. सम्मेलन के जरिए 13 सूत्रीय ‘महिला घोषणापत्र’ जारी किया गया जो आगामी संघर्ष का आधार भी बनेगा.

सम्मेलन में बतौर वक्ता जनजागरण अधिकार मंच से कमायानी, सामाजिक कार्यकर्ता रितु, ऐपवा की राष्ट्रीय सचिव प्रो. सुधा चौधरी, पत्रकार और गांधीवादी कार्यकर्ता मणिमाला, यूपी महिला कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष प्रतिभा अटल पाल, समाजवादी महिला सभा की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष नेहा यादव तथा आम आदमी पार्टी से मोहिनी ने अपनी बात रखी.

महिला अधिकार से संबंधित मुद्दों पर सांस्कृतिक कार्यक्रम भी हुए. कार्यक्रम में सूरज एंड टीम ने अपना इमेज थियेटर प्रस्तुत किया, दस्ता के साथी विवेक सुलतानवी ने अपने क्रांतिकारी गीतों से कार्यक्रम में ऊर्जा भरा, संस्कृति ने नृत्य पेश किया तथा प्रेरणा कला मंच ने नाटक प्रस्तुत किया.

कार्यक्रम में यूपी कांग्रेस के अध्यक्ष अजय राय. गुरुचरण कौर, अनुराधा यादव, बिंदु, संध्या, रितु पांडेय, गांव के लोग से अपर्णा, जागृति राही, फादर आनंद, अफलातून, ज्योति, कुसुम वर्मा, रैनी, इंदु, विजेता सिंह, नीति आदि मौजूद रहे.

इस सम्मेलन का आयोजन दखल, ऐपवा, लोक समिति, महिला चेतना समिति, साझा संस्कृति मंच, आइसा, बीएसएम, प्रिस्मैटिक फाउंडेशन और मनरेगा मजदूर यूनियन द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित किया गया.

इस सम्मेलन में हजारों की संख्या में महिलाओं से हिस्सा लिया. वक्ताओं के अलावा कामगार महिलाओं और छात्राओं ने सुरक्षा, शिक्षा, सम्मान, रोजगार संबंधित चुनौतियों पर अपनी बातचीत रखी.

ऐसे ही कार्यक्रम देश के अन्य राज्यों में भी आयोजित हुए जिनमें सैकड़ों की तादाद में महिलाओं शामिल हुईं.

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