वर्ष - 28
अंक - 45
26-10-2019

सुखाड़, पेयजल संकट, अतिवृष्टि और दरधा नदी की बाढ़ झेलती जहानाबाद की जनता को दशहरे में दंगे का सामना करना पड़ा था. सम्मेलन के पहले दिन 21 अक्टूबर को रेलवे स्टेशन से दंगा के विरोध में शांति व एकजुटता के लिए विशाल मार्च निकला जिसमें दो हजार से भी अधिक लोग शामिल थे. इस मार्च का नेतृत्व पार्टी के राज्य सचिव का. कुणाल, पार्टी विधायक दल के नेता का. महबूब आलम, पोलित ब्यूरो सदस्य का. अमर, वरिष्ठ पार्टी नेता का. रामजतन शर्मा, का. महानंद, का. श्रीनिवास शर्मा, डा. रामाधार सिंह और का. रामबली सिंह यादव ने किया. एकजुटता मार्च रेलवे स्टेशन से मुख्य मार्ग होते हुए हाॅस्पिटल मोड़ पहुंचा जहां से उसने शहर के मुख्य बाजार में प्रवेश किया और सट्टी मोड़, मलहचक मोड़, फिदा हुसैन रोड होते हुए पुनः मुख्य मार्ग से अरवल मोड़ के पास स्थित शालीमार रेस्ट हाउस पहुंचा. शालीमार रेस्ट हाउस के सामने ही का. हसनैन अंसारी की अध्यक्षता में सद्भावना सभा आयोजित हुई. सभा को का. रामबली सिंह यादव, डा. रामाधार सिंह, का. महानंद, का. कुणाल और का. महबूब आलम ने संबोधित किया.

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मार्च में शामिल लोग अपने हाथों में नारे लिखे तख्तियां व भारी संख्या में लाल झंडे लिए हुए थे. मार्च व सभा के दौरान उन्होंने एक स्वर में ये नारे लगाए – ‘दंगा नहीं रोजगार चाहिए-आर्थिक मंदी, महंगाई और बाढ़ सुखाड़ का इलाज चाहिए’, ‘दंगे के सूत्रधार – संघ व भाजपा नेताओं को करो गिरफ्तार’, ‘दंगा की राजनीति का विरोध करो. जन एकता को बुलंद करो’, ‘दंगा पीड़ितों पर पुलिसिया दमन बंद करो’, ‘दंगा में सहभागी डीएम-एसपी पर कार्रवाई करो’, ‘दंगा पीड़ितों को बिना भेदभाव किये नुकसान का पूरा मुआवजा दो और गिरफ्तार निर्दोष दंगा पीड़ितों को रिहा करो.’

“भाजपा प्रायोजित सरकारी दंगा” से सहमा हुआ जहानाबाद शहर इस मार्च के बाद फिर से खड़ा होने लगा. कई जगह से प्रतिक्रिया मिली है कि दंगे के बाद दहशत को समाप्त करने में पुलिस तो सफल नहीं हुई, पर इस मार्च से हमलोगों में फिर से आत्मविश्वास जग गया है. सभा में मुस्लिम समुदाय के लोगों ने भी भारी तादाद में शिरकत की. एकजुटता मार्च व सभा के बाद जिला सम्मेलन शुरू हुआ. सम्मेलन के दौरान दोनों ही दिन दंगा में नुकसान उठानेवाले पीड़ित हाॅल तक आते रहे और इसकी सफलता की शुभकामनाएं देते रहे. ऐसा लगा मानों भाकपा(माले) जहानाबाद के लिए जीवन रेखा हो.

mehaboob