वर्ष - 29
अंक - 9
15-02-2020

मेवात में अनिश्चितकालीन धरना

हरियाणा के मेवात क्षेत्र के नूह जिले के नगीना ब्लाॅक में बड़कली चौक पर 30 जनवरी 2020 से सीएए, एनआरसी, एनपीआर के विरोध में अनिश्चित कालीन धरना दिया जा रहा है, जिसमे बहुत बड़ी संख्या में महिला पुरुष लगातार इस धरने को जारी रखे हुए हैं. यूं कहा जाए कि हरियाणा में सीएए, एनआरसी, एनपीआर के विरोध में इस समय का यह सबसे बड़ा धरना चल रहा है. इस धरने के साथ एकजुटता जाहिर करने के लिये अखिल भारतीय किसान महासभा की तरफ से कामरेड प्रेम सिंह गहलावत दिनांक 19 फरवरी 2020 को वहां गये. उनके साथ डा. रफीक एवं अन्य लोग भी धरने में मौजूद रहे.

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झारखंड में एंटी एनआरसी शिविर

विगत 16 फरवरी 2020 को झारखंड के कोडरमा जिले के जयनगर के सांस्कृतिक भवन में सीएए, एनआरसी, एनपीआर के विरोध में एक प्रशिक्षण शिविर का आयोजन किया गया. शिविर में मुख्य अतिथि भाकपा(माले) के राज्य कमेटी सचिव कामरेड जनार्दन प्रसाद थे. प्रशिक्षण शिविर का संचालन माले जिला सचिव कामरेड मोहन दत्ता व जयनगर प्रखंड सचिव अशोक यादव ने किया. कन्वेंशन को पूर्व जिला परिषद सदस्य कामरेड वासुदेव यादव ने भी सम्बोधित किया. शिविर को ऐपवा नेता नीलम शाहबादी, और जिला कमेटी सदस्य तुलसी राणा, डोमचांच प्रखंड सचिव राजेंद्र मेहता, राजेंद्र प्रसाद यादव, मुखिया प्रतिनिधि भोला यादव, जिला कमेटी सदस्य असगर अंसारी, विनोद पांडे, मुन्ना यादव आदि ने भी सम्बोधित किया. शिविर में सुरेंद्र सिंह, शम्भू नाथ वर्मा, मो. इब्राहिम, रामचन्द्र साव, महेश सोनी, शम्भू पासवान के अलावा काफी बड़ी संख्या में पार्टी कार्यकर्ता उपस्थित थे.

अपने सम्बोधन में कामरेड जनार्दन प्रसाद ने कहा कि सीएए, एनपीआर, एनआरसी आदि के जरिये एक ओर सरकार स्पष्ट रूप से देश में साम्प्रदायिक विभाजन को हवा दे रही है तो दूसरी ओर देश के गरीबों-दलितों-आदिवासियों से उनके नागरिक होने का सबूूत मांग रही है, जिसके न होने पर उनको सारी सुविधाओं व अधिकारों से वंचित कर दिया जायेगा और डिटेंशन कैम्प में डाल दिया जायेगा. इस कानून से देश में अफरातफरी का माहौल मच जायेगा जैसा नोटबंदी के बाद हुआ था. किसी भी अमीर काले धन वाले को कहीं लाइन में नहीं लगना पड़ा और उनका सारा काला धन सफेद हो गया जबकि गरीबों को बैंकों व एटीएम के आगे लम्बी लम्बी लाइनों में लगना पड़ा जिससे कई लोगों की तो मौत भी हो गई. विकास, बेरोजगारी व भ्रष्टाचार मिटाने की जुमलेबाजी करके मोदी सरकार सत्ता में आई लेकिन वह उल्टे काम कर रही है और काला कानून लाकर विकास व बेरोजगारी के मुद्दों से लोगों का ध्यान भटका रही है. चंद पूंजीपतियों के फायदे में वह देश की सार्वजनिक सम्पत्तियों को बेच रही है और झूठी राष्ट्रभक्ति का ढोंग रच रही है. कार्यकर्ताओं को गांव-गांव में, घर-घर में जाकर इन कानूनों के बारे में बताना होगा और इनके विरोध के लिये व्यापकतम गोलबंदी करनी होगी.

डोरंडा में छात्रों की प्रतिरोध सभा

एनपीआर, एनआरसी व सीएए के खिलाफ आइसा, एआईएसएफ व अन्य वाम छात्र संगठनों ने 16 फरवरी 2020 को रांची जिले के डोरंडा के हाथीखाना प्रतिरोध सभा आयोजित की. आजादी के नारों के साथ छात्रा संगठनों ने केन्द्र के नीतियों पर जोरदार प्रहार किया और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से मांग किया कि वे एनपीआर, एनआरसी, सीएए को झारखंड में लागू नहीं कर संबंधी प्रस्ताव को विधान सभा से पारित करवायें. एनपीआर, एनआरसी व सीएए झारखंड की जन भावना के खिलाफ है और राज्य के बहुसंख्यक आदिवासी और दलित इससे प्रभावित होंगे.

सभा को संबोधित करते हुए छात्र नेताओं ने कहा कि देश की साझी संस्कृति हमारी विरासत है इसलिए केन्द्र सरकार देश को बांटने की राजनीति बंद करे. धार्मिक आधार पर नागरिकता संविधान के खिलाफ है और संविधान और देश की एकता-सद्भाव को नष्ट करने की इस साजिश पर देश के छात्रा संगठन चुप नहीं बैठेंगे. देश के छात्रा-युवाओं का यह आंदोलन देश की आजादी की दूसरी लड़ाई की शुरूआत है जो विभाजनकारी कानूनों के वापसी तक जारी रहेगी. इस कार्यक्रम में छात्र-युवाओं के अलावा बड़ी संख्या में स्थानीय लोगोें ने भाग लिया. सभा की शुरूआत बच्चियों के द्वारा राष्ट्रगान से हुई. सभा को एआईएसएफ शुभम बनर्जी व लोकेश आनंद और आइसा के अविनाश रंजन व नौरीन अख्तर ने संबोधित किया. विकम कुमार, जफीर अहमद कुरैशी, हम्माद, दानिश, सुनिता मुर्मू आदि कई छात्र नेता मौके पर मौजूद थे.