गया और पालीगंज में आजादी के 75 साल: जनअभियान की बैठक आयोजित

आजादी के 75 साल: जन अभियान की एक महत्वपूर्ण बैठक गया में विगत 13 फरवरी 2022 को आयोजित हुई. रेड क्राॅस भवन के पास ‘बागीचा - द पार्टी लाॅन’ में आयोजित बैठक में शहर के नागरिक समाज, बुद्धिजीवी, लेखक सहित राजनीतिक-सामाजिक कार्यकर्ता शामिल हुए.

बैठक में 1857 से लेकर 1947 तक आजादी की लड़ाई में गया जिले की भूमिका को सामने लाने पर चर्चा हुई. बैठक की अध्यक्षता वरिष्ठ अधिवक्ता फैयाज हाली ने की.

‘योगी को भेजो मेल’ अभियान से आगे बढ़ता उत्तर प्रदेश का आशा आंदोलन

उत्तर प्रदेश में ऐक्टू से सम्बद्ध आशा वर्कर्स यूनियन द्वारा 20 से 24 दिसंबर तक ‘योगी को भेजो मेल’ नाम से अपनी मांग लिखे पोस्ट कार्ड भेजने का एक अनोखा अभियान चलाया गया. प्रदेश के कई जिलों में जबर्दस्त उत्साह और इसे लोकप्रिय बनाने के नये-नये तरीकों के साथ हजारों आशाकर्मियों ने इसमें हिस्सा लिया.

आजादी के 75 साल : जन अभियान आगे बढ़ा

बुद्धिजीवियों की बैठकों, कार्यक्रमों का दौर शुरू आजादी के 75 साल का जन अभियान बिहार में जिला स्तर पर शुरू हो गया है. 18 नवंबर को पटना के भारतीय नृत्य कला मंदिर में आयोजित जनकन्वेंशन के बाद अब तक कई जिलों में इस अभियान को गति देने के लिए बुद्धिजीवियों-इतिहासकारों व संस्कृतिकर्मियों की बैठकें आयोजित हुई हैं. कई कार्यक्रम भी आयोजित किए गए हैं. आजादी के आंदोलन के मूल्यों व विचारों को जनता तक ले जाने के इस अभियान को भरपूर समर्थन भी मिल रहा है.

मोतिहारी में बत्तख मियां की बरसी पर जनकन्वेंशन

आजादी के 75 साल पर बिहार में जन अभियान


भारत की आजादी के लिए चला आंदोलन विश्व इतिहास में अपने ढंग का एक बड़ा और कई महत्वपूर्ण बदलावों वाला आंदोलन था. औपनिवेशिक शोषण व्यवस्था के खिलाफ लगभग 200 वर्षों तक जनता के विभिन्न हिस्सों का चलने वाले इस अनवरत संषर्ष के केन्द्र में एक नए व आधुनिक भारत के निर्माण का सपना था. 1857 के पहले स्वतंत्रता संग्राम से लेकर 1942 के आंदोलन के दरम्यानी समय में करोड़ों-करोड़ जनता आंदोलित हुई. आंदोलन के दौरान लाखों गिरफ्तारियां व हजारों शहादतें हुईं लेकिन लोग लड़ते रहे – यह हमारे इतिहास का स्वर्णिम पक्ष है.

किसानों के जघन्य हत्याकांड के दोषी केंद्रीय गृह राज्य मंत्री की बर्खास्तगी की मांग के साथ उत्तर प्रदेश में भाकपा(माले) का जन अभियान

भाकपा(माले) व अखिल भारतीय किसान महासभा ने लखीमपुर में किसानों के जघन्य हत्याकांड के दोषी केंद्रीय गृह राज्य मंत्री की बर्खास्तगी की मांग के साथ 7 से 13 अक्टूबर तक सप्ताह भर सघन जन अभियान चलाया. इस अभियान के तहत गांवों व हाट-बाजारों में पर्चा वितरण, प्रतिवाद मार्च, नुक्कड़ सभाएं व मोदी-योगी सरकार के पुतला दहन के कार्यक्रम आयोजित किए गए. 12 अक्टूबर को श्रद्धांजलि सभा एवं 13अक्टूबर को गृह राज्य मंत्री पर एफआईआर दर्ज करने, मंत्रिमंडल से बर्खास्त करने व निष्पक्ष जांच सुनिश्चित कराने के लिए अबिलंब गिरफ्तार करने की मांग करते हुए राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन भेजे गए.

बिहार के राज्यपाल की ओर से आयोजित सर्वदलीय बैठक में भाकपा(माले) द्वारा दिए गए सुझाव

 

1. बिहार के मुख्यमंत्री इस बात की गारंटी करें कि समय-समय पर इस तरह की सर्वदलीय बैठकें राज्य से लेकर जिला स्तर पर आयोजित की जाएं. कोरोना से निपटने में जिला स्तर पर इस तरह की आपसी समझदारी काफी मददगार साबित हो सकती है. भाकपा(माले) कोरोना व लाॅकडाउन के पहले दौर से ही इस प्रकार की बैठकों की मांग करते रही है.

कोरोना कहर में पीड़ितों की सेवा के संकल्प का नाम है -- भाकपा(माले)

 

बिहार में उल्टा चल रहा है. इस संकट के समय में विपक्ष ख़ासकर वामपंथी सड़क पर हैं. अस्पताल-अस्पताल जाकर कोरोना पीड़ितों की मदद में जुटे हैं और सत्ताधारी ‘ऑल इज वेल’ कहते हुए विपक्षियों को कोसने में मगन हैं.

छुपाने के हर जतन के बावजूद ये बात अब छिप नहीं रही है कि अबकी बार कोरोना महामारी संक्रमण की त्रासद आपदा ने जहां देशहित का नारा लगाने वाली सरकारों की देश के नागरिक स्वास्थ्य से जुड़े हर मामले की ऐसी पोल खोली है कि कोई बहाना-जुमला लोगों को रास नहीं आ रहा.

का. दीपंकर भट्टाचार्य ने पिछले दिनों असम के बेहाली विधानसभा क्षेत्र में

 

भाकपा(माले) महासचिव का. दीपंकर भट्टाचार्य ने पिछले दिनों असम के बेहाली विधानसभा क्षेत्र में, जहां पार्टी की केन्द्रीय कमेटी सदस्य का. बिबेक दास हमारे प्रत्याशी हैं, चुनाव प्रचार अभियान में हिस्सा लिया. कई जन सभाओं को संबोधित किया. पार्टी केन्द्रीय कमेटी सदस्य का. मो. सलीम ने भी वहां कई चुनाव सभाओं को संबोधित किया.