बिहार, उत्तर प्रदेश, झारखंड समेत कई राज्यों में उतरे माले कार्यकर्ता

रेल-सड़क यातायात भी हुआ बाधित

खेग्रामस भी अपनी मांगों पर बंद में शामिल

13-प्वाइंट रोस्टर के खिलाफ भारत बंद

13 प्वाइंट रोस्टर प्रणाली को वापस लेने, 200 प्वाइंट रोस्टर प्रणाली पर अध्यादेश लाने, गैर संवैधानिक आर्थिक रूप से पिछड़े वर्ग के लिए 10 प्रतिशत आरक्षण के प्रावधान को रद्द करने, आदिवासियों के विस्थापन पर रोक तथा गरीबों-गृहविहीनों के राजिस्टर बनाने की मांग पर 5 मार्च 2019 को भारत बंद के समर्थन में भाकपा(माले) कार्यकर्ताओं ने बिहार के विभिन्न इलाकों में रेलवे के परिचालन को बाधित किया, राष्ट्रीय व राजकीय उच्चपथों पर यातायात परिचालन बाधित किया और जगह-जगह प्रदर्शन किए. इसी आंदोलन से जुड़कर खेग्रामस ने दलितों-गरीबों के वास-आवास पर किए जा रहे हमले के खिलाफ सभी दलित-गरीबों व गृहविहीनों के लिए राष्ट्रीय स्तर पर रजिस्टर बनाने की मांग पर भारत बंद के समर्थन में जिला व प्रखंड मुख्यालयों पर प्रदर्शन किए. प्रदर्शन के दौरान खेग्रामस कार्यकर्ताओं ने अपनी मांगों से संबंधित और देश के राष्ट्रपति के नाम संबोधित ज्ञापन स्थानीय अधिकारियों को सौंपा.

माले राज्य सचिव कुणाल ने कहा है कि दलितों व पिछड़े समुदाय को प्राप्त आरक्षण पर केंद की मोदी सरकार लगातार हमला कर रही है और उसे समाप्त करने पर तुली है और दूसरी ओर उसने संविधान विरोधी आर्थिक रूप से पिछड़े वर्ग के लिए 10 प्रतिशत आरक्षण का झुनझुना लाया है. दलितों व पिछड़ो के आरक्षण में कटौती और आर्थिक रूप से पिछड़े वर्ग को 10 प्रतिशत का प्रावधान संविधान विरोधी कदम है. 13 प्वाइंट रोस्टर प्रणाली लागू होने से विश्वविद्यालयों में दलित व पिछड़े वर्गों के छात्रों की रही सही संभावना भी खत्म हो जाएगी. एक भी आरक्षित वर्ग के छात्रा शिक्षक के रूप में बहाल नहीं हो सकेंगे. आज के भारत बंद ने इसे वापस लेने तथा 200 प्वाइंट रोस्टर प्रणाली पर अध्यादेश लाने की मांग को गति प्रदान की है. केंद्र सरकार को तत्काल इस पर अध्यादेश लाना चाहिए.

खेग्रामस महासचिव धीरेन्द्र झा ने कहा कि न केवल दलित व पिछड़े समुदाय के आरक्षण में कटौती की जा रही है, बल्कि उन्हें पूरे देश में वास की जमीन से विस्थापित किया जा रहा है. बिहार में तो खासकर बरसों से बसे गरीबों को भी बेदखल किया जा रहा है. बिहार में लाखों गरीबों को या तो उजाड़ दिया गया है अथवा उजाड़ने की नोटिस दी गई है. आजादी के इतने सालों बाद भी हाउसिंग राइट मौलिक अधिकार का दर्जा प्राप्त नहीं कर सका है. आज इसके खिलाफ पूरे राज्य में खेग्रामस के बैनर से लाखों गरीबों ने जिला व प्रखंड मुख्यालयों पर प्रदर्शन किया. सरकार जंगलों में आदिवासियों को उजाड़ रही है और मैदानों में दलित-गरीबों को. मोदी की इस कॉरपोरेटपरस्ती को पूरा भारत देख रहा है और आने वाले दिनों में उन्हें सबक सिखायेगा.

बिहार में रेलवे का परिचालन बाधित

आरा में भाकपा(माले), आइसा व आरवाइए कार्यकर्ताओं ने रेलवे के परिचालन को बाधित किया. माले के लोकप्रिय नेता राजू यादव के नेतृत्व में शहर में मार्च निकाला गया. आरवाइए के राष्ट्रीय अध्यक्ष मनोज मंजिल व प्रदेश अध्यक्ष अजीत कुशवाहा ने भारत बंद का नेतृत्व संभाला. दरभंगा में अहले सुबह संपर्क क्रांति के परिचालन को ठप्प कर दिया गया. आइसा व आरवाइए कार्यकर्ताओं ने जानकी एक्सप्रेस के परिचालन को भी बाधित किया. बेगूसराय में आइसा ने रेल मार्ग केा जाम किया.

भारत बंद के दौरान दरभंगा में माले कार्यकर्ताओं ने लहेरियासराय-बहेड़ी पथ को घंटों जाम रखा. अरवल में एनएच-139 व एनएच-110 को जाम किया गया. बांका में भी भारत बंद का व्यापक समर्थन मिला. जमुई के चकाई में धरना दिया गया. कटिहार में एनएच-98 को आइसा व आरवाइए कार्यकर्ताओं ने जाम किया. समस्तीपुर में शहर में मार्च निकाला और सभा आयोजित की.जहानाबाद के सभी प्रखंड मुख्यालयों पर खेग्रामस द्वारा धरना दिया गया. पटना ग्रामीण के पालीगंज, मसौढ़ी, दुल्हिनबाजार, बिहटा आदि प्रखंड मुख्यालयों पर धरना दिया गया. बिहार के लगभग 200 प्रखंड मुख्यालयों पर आज का यह कार्यक्रम हुआ.

झारखंड

सरिया (गिरिडीह) में भारत बन्द कार्यक्रम के समर्थन में भाकपा(माले) आइसा, इनौस व झामस के संयुक्त तत्वावधान में आदिवासियों-दलितों पर बढ़ते हमले, झारखण्ड विरोधी स्थानीयता नीति तथा आरक्षण में छेड़छाड़ के खिलाफ और जवानों के लिये ‘वन रैंक वन पेंशन’ लागू कराने, सभी जवानों को शहीद का दर्जा दिलाने, देश में रोजगार की स्थिति पर श्वेत पत्र जारी कराने तथा 13 प्वाइंट रोस्टर की जगह 200 प्वाइंट रोस्टर सिस्टम को पुनः लागू करने के लिए मार्च निकाला गया और नुक्कड सभा की गई. मैट्रिक एवं इंटर के परीक्षार्थियों की सुविधा को मद्देनजर रखते हुए आवागमन बाधित किये बगैर भारत बन्द को सफल किया गया. इनौस जिला उपाध्यक्ष सोनू पांडेय ने सरिया बाजार के व्यवसायी बन्धुओं और दुकानदार मित्रों को धन्यवाद दिया जिन्होंने एक दिन पूर्व महज अपील से अपने-अपने प्रतिष्ठान बन्द रखे और इस आन्दोलन को सफल बनाने में सहयोग किया. इसके अलावे बगोदर में जीटीरोड, बिरनी, राजधनवार, जमुआ, देवरी, गावां, तीसरी, बेंगाबाद, गांडेय, गिरिडीह सदर आदि सभी जगहों पर भाकपा(माले) और उनके जनसंगठन व्यापक जनाधार के साथ बन्द में उतरे और उन्होंने बड़े पैमाने पर सड़क जाम किया.

इस दिन लातेहार जिला के बरवाडीह प्रखंड में माले प्रखंड सचिव राजेंद्र सिंह और जिला कमेटी के नेता कन्हाई सिंह की अगुवाई में पार्टी कार्यकर्ता बंद में उतरे, पुलिस ने 41 लोगों को गिरफ्तार कर थाने में रखा और शाम 4 बजे उन्हें छोड़ा. मनिका में माले प्रखंड सचिव बच्चन सिंह और धनेश्वर सिंह की अगुवाई में सैकड़ों लोग रोड पर उतरे जिन्हें पुलिस ने हिरासत में ले लिया और उन्हें भी शाम 4 बजे छोड़ा गया. लातेहार में माले नेता गोपाल जी के साथ दर्जनों लोगों को पुलिस ने गिरफ्तार किया. महुआडर में माले नेता बेन्जामिन कुजूर और लतीफ अंसारी के नेतृत्व में बंद को सफल बनाया गया. लगभग सभी जगह बंद सफल और शांतिपूर्ण रहा.

हजारीबाग के बरकट्ठा प्रखंड में भाकपा(माले) के राज्य कमेटी सदस्य भुवनेश्वर केवट, प्रखंड सचिव शेर मोहम्मद और अन्य कार्यकर्ताओं के नेतृत्व में असरदार बन्द कराया गया जिसमें घंटों गाडियां खड़ी रहीं. डोमचांच में प्रखंड सचिव राजेन्द्र मेहता के नेतृत्व में मार्च निकाला गया. मार्च के बाद टैक्सी स्टैंड में का. भागीरथ सिंह की अध्यक्षता में सभा की गई. मार्च में ऐपवा राज्य सचिव का. गीता मंडल, भागीरथ सिंह, बबन मेहता, किशन मेहता समेत सैकडों लोग शामिल हुए. झुमरी तिलैया में भी जयप्रकाश यादव, श्यामदेव यादव व प्रेम प्रकाश के नेतृत्व में बाजार बंद कराया गया और रोड जाम किया गया. गढ़वा, रामगढ़ और धनबाद जिलों में भी कई जगहों पर भाकपा(माले) कार्यकर्ता बंद के समर्थन में सड़कों पर उतरे.

उत्तर प्रदेश

13 प्वाइंट रोस्टर और 20 लाख आदिवासी-वनवासी परिवारों की वनभूमि से बेदखली के संकट के खिलाफ संविधान व सामाजिक न्याय की रक्षा से जुड़े संगठनों के 5 मार्च के भारत बंद के आह्वान के समर्थन में भाकपा (माले) और जनसंगठन उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों में सड़कों पर उतरे. अखिल भारतीय खेत व ग्रामीण मजदूर सभा (खेग्रामस) ने भी इसी दिन ग्रामीण गरीबों के लिए आवास, आजीविका, भूमि, शिक्षा, स्वास्थ्य से जुड़ी मांगों के लिए ब्लॉक मुख्यालयों पर धरना-प्रदर्शन का देशव्यापी आह्वान किया था.

राजधानी लखनऊ में बंद के समर्थन में आइसा व अन्य छात्रा संगठनों, शिक्षकों और आम छात्रों ने लखनऊ विश्वविद्यालय से परिवर्तन चौक होते हुए जीपीओ चौराहा तक संयुक्त मार्च निकाला. पुलिस से झड़प के बावजूद चौराहे पर सभा हुई. आइसा राज्य सचिव शिवा रजवार ने कहा कि आज जब सत्तापक्ष पूरे देश को युद्धोन्माद में धकेलने की कोशिश कर रहा है और उसकी आड़ में तमाम मुख्य मुद्दों शिक्षा, रोजगार और सामाजिक न्याय को बेवाजिब बनाने की साजिश रच रहा है, तब चाहे वो 13 प्वाइंट रोस्टर का मामला हो, आदिवासियों से जमीन छीनने का मामला हो, राफेल घोटाले की बात हो, सैनिकों की शहादत पर सियासी रोटियां सेंकने का मामला हो - सब पर इस सरकार को घेरने की कोशिश होनी चाहिए और देश का युवा इस जिम्मेदारी को बख़ूबी निभा रहा है. जब तक ये गैर लोकतांत्रिक 13 प्वाइंट रोस्टर वापस नहीं होता, तब तक यह संघर्ष जारी रहेगा. युवा नेता ने मांग की कि सरकार जल्द-से-जल्द 200 प्वाईंट रोस्टर को लागू करने के लिए अध्यादेश लेकर आये और आदिवासियों की जमीनों को बचाने के लिए भी फौरन कदम उठाए. ल.वि.वि. कैम्पस इकाई के संयोजक अतुल व सह-संयोजक शिवम सफीर ने भी अपनी बात रखी. सभा में आइसा प्रदेश उपाध्यक्ष नितिन राज, आयुष श्रीवास्तव, शिवम यादव, रतन सेन बादल, अनिल कुमार, ऐपवा नेता मीना, आरवाइए के राजीव गुप्ता, राहुल यादव, ख्वाजा अहमद अब्बास समेत बड़ी संख्या में छात्रा-युवा मौजूद थे.

इसके पहले, लखनऊ सदर तहसील मुख्यालय पर भाकपा(माले), ऐपवा, निर्माण मजदूर यूनियन ने 5 मार्च को भारत बन्द के समर्थन में और गरीबों, मजदूरों, झुग्गी-झोपड़ी वासियों के सवालों को लेकर माले जिला प्रभारी रमेश सेंगर के नेतृत्व में धरना-प्रदर्शन किया. प्रदर्शन के अन्त में राष्ट्रपति को सम्बोधित 10-सूत्री मांगपत्र उप-जिलाधिकारी को सौंपा गया.

इलाहाबाद (प्रयागराज) में भाकपा(माले) के राज्य कमेटी सदस्य कमल उसरी के नेतृत्व में हाईकोर्ट अम्बेडकर प्रतिमा से सुभाष चौराहा तक जुलूस निकाला गया. अम्बेडकर-पेरियार स्टडी सर्किल के संयोजक एडवोकेट माता प्रसाद पाल, अम्बेडकर एकता मंच के संयोजक राम सिंह समेत बड़ी संख्या में अधिवक्ता भी मौजूद थे. जुलूस में शामिल लोग वहां हुई तमाम संगठनों की संयुक्त रैली में भी शामिल हुए.

फैजाबाद (अयोध्या) में खेग्रामस ने गुलाबबाड़ी पार्क से जुलूस निकाल कर शहर में मोदी-योगी सरकार-विरोधी नारे लगाते हुए मार्च किया और गांधी पार्क पहुंचकर सभा की, जिसे माले राज्य कमेटी सदस्य अतीक अहमद, खेग्रामस जिलाध्यक्ष अखिलेश चतुर्वेदी, राष्ट्रीय पार्षद सहोदरा चौहान, सचिव नन्द कुमार, माले नेता उमाकांत विश्वकर्मा, पप्पू सोनकर व अन्य नेताओं ने संबोधित किया. वक्ताओं ने ग्रामीण गरीबों की मांगों को उठाते हुए कहा कि शहर में धारा 144 के नाम पर लोकतंत्र को स्थगित कर दिया गया है. आरएसएस को लाठी मार्च करने की छूट है, दूसरी तरफ गरीबों, मजदूरों, दलितों की आवाज को बलपूर्वक दबाने की कोशिश की जा रही है. जिले में 40 प्रतिशत गरीबों के पास भूमि और आवास नहीं है. जिनको वर्षों पहले भूमि का पट्टा मिला, उन्हें आज तक कब्जा नहीं मिला. सरकार इस पर मौन ही नहीं, बल्कि प्रशासन दबंगों के पक्ष में खड़ा रहता है. गरीब लोकसभा चुनाव में सबक सिखायेंगे और मोदी को बाहर करेंगे. सभा स्थल पर मजिस्ट्रेट को 11-सूत्री मांगपत्र सौंपा गया.

गाजीपुर शहर में बंद के समर्थन में माले और खेग्रामस की ओर से तुलसीसागर लंका कार्यालय से मार्च निकालकर कामरेड सरयू पांडेय पार्क में धरना-प्रदर्शन किया गया. जिले के जमानिया तहसील में पांडेय मोड़ कार्यालय से जुलूस निकालकर एसडीएम जमानिया को मांगपत्र सौंपा गया, जबकि सैदपुर के खानपुर बाजार में मार्च निकालकर सभा की गई.

सीतापुर जिले में हरगांव ब्लाक पर खेग्रामस ने धरना-प्रदर्शन किया. संगठन की केन्द्रीय कार्यसमिति के सदस्य अर्जुन लाल ने धरने को संबोधित करते हुए कहा कि मोदी-योगी सरकार ने गरीबों पर हमले किए हैं. महिलाओं के साथ बड़ी नाइंसाफी की है - 90 फीसदी रसोइया महिला हैं, लेकिन पंजीकरण की आयु सीमा 40 साल किया है, जिससे लाखों महिलायें प्रभावित होगी और अपने अधिकारों से वंचित हो जायेंगी. उन्होंने कहा कि सरकार ने गैस के दाम बढ़ाकर महंगाई बढ़ाई और मनरेगा बजट में कटौती कर लाखों मजदूरों से रोजगार छीन लिया. यही नहीं वन अधिकार कानून को कड़ाई से लागू करने के बजाय लाखों वनवासियों को जंगलों से बेदखल करने का आधार तैयार किया जा रहा है. मोदी सरकार अपने किये गये वादों से बचने के लिए और भी नये-नये जुमले फेंक रही है. सात-सूत्री मांग पत्र खंड विकास अधिकारी के माध्यम से राष्ट्रपति को भेजा गया.

लखीमपुर खीरी में भाकपा(माले), किसान महासभा व आइसा ने बंद की अपील करते हुए जुलूस निकला, जो विलोबि मैदान पहुंचकर धरना में बदल गया. धरने के माध्यम से 200 प्वाईंट रोस्टर लागू करने, आदिवासियों को जमीन का मालिकाना हक देने, लखीमपुर में जंगल भूमि के नाम पर किसानों का उत्पीड़न करना बन्द करने और कुरैया रानीनगर में अम्बेडकर की जब्त मूर्ति को थाने से वापस करने की मांगें उठाई गईं. भारत बंद के समर्थन में और खेग्रामस के राष्ट्रीय आह्नान पर बनारस, भदोही, मऊ, कुशीनगर, महाराजगंज, पीलीभीत आदि जिलों में भी धरना-प्रदर्शन कर मांगपत्र सौंपा गया.